Monday, February 13, 2017

रेडिओ की याद ... World Radio Day




आज भी कान में गूंजता है - "ये आकाशवाणी है ..अब आप रामानन्द प्रसाद सिंह से समाचार सुनिए" ...
आज वर्ल्ड रेडिओ डे है - रेडिओ से जुडी कई यादें हैं - यूँ कहिये जिस जेनेरेशन से हम आते हैं - वो रेडिओ से ही शुरू होता है ..फिर रेडिओ से स्मार्टफोन तक का हमारा सफ़र ..:) 

बाबा पौने नौ वाला राष्ट्रीय समाचार जरुर से सुनते थे - फिर समाचार के वक़्त ही रात्री भोजन - बड़े वाले पीढ़ा पर बैठ कर - वहीँ बगल में हम भी उनके गोद में ..:) लगता था ..ये लोग कौन हैं ..जो 'समाचार पढ़ते' हैं ...बस एक कल्पना में उनकी आकृती होती थी ...साढ़े सात का प्रादेशिक समाचार ...फिर दोपहर का धीमीगती का समाचार ...हर घंटे समाचार ..:) 
रेडिओ विश्वास था - जब तक रेडिओ ने कुछ नहीं कहा - कैसे 'झप्पू भैया' का बात मान लें ...रेडिओ ने कह दिया ...जयप्रकाश नारायण नहीं रहे - स्कूल में छुट्टी ...रेडिओ अभी तक नहीं कहा ...छुट्टी नहीं हुई ...
कॉलेज में पढता था तो रोज शाम बीबीसी - हिंदी सेवा जरुर सुनता था ! भारत से लेकर पुरे विश्व की खबर ! तब अमेरिका , ऑस्ट्रेलिया , और अन्य देशों के हिंदी सेवा सभी के सभी के समय पता होते थे  ! घर में एक ग्रामोफोन होता था , जिसमे रिकॉर्ड प्लेयर और रेडिओ साथ साथ ! फिर पानासोनिक का बड़ा वाला टू इन वन ! मीडियम वेव , शोर्ट वेव और मालूम नहीं क्या क्या !
इलेक्ट्रोनिक्स और कम्युनिकेशन इंजिनियर होने के नाते एक बात बताता हूँ - सबसे मुश्किल काम होता है - एंटीना डिजाईन ! एंटीना दिखने में जितना सिंपल - उसका डिज़ाइन - उतना ही मुश्किल ! 
शौक़ीन ट्रांजिस्टर रखते थे - क्रिकेट की कमेंट्री कान में लगा कर , शाल ओढ़ कर छत पर ऐसे सुन रहे होते थे जैसे वो भी स्टेडियम में बैठों हो ! इंजीनियरिंग में मेरे लिए सबसे मुश्किल था - ट्रांजिस्टर कैरेक्ट्रिक्स समझना :( आज भी दिमाग में नहीं घुसता है :( 
कुछ चाचा / मामा टाईप आइटम होते थे ...कब किस स्टेशन से गीत आ रहा होगा ...एकदम से एक्सपर्ट ...रेडिओ हाथ में लिया और धडाक से वही स्टेशन ..हम बच्चे मुह बा के उनको देखते ...गजब के हाई फाई हैं ...फिर उन गीतों में फरमाईश ...क्या जमाना था ..लोग एक गीत सुनने के लिए ..पोस्टकार्ड पर पुरे गाँव / मोहल्ले का नाम लिख भेजते थे ...फलना पोस्टबैग नंबर ...दो नाम आज तक याद हैं - झुमरी तिलैया से सबसे ज्यादा चिठ्ठी आते थे और महाराष्ट्र के 'बाघमारे' परिवार पुरे खानदान का नाम लिख भेजते थे !
हिंदी मीडियम दस बजिया स्कूल में पढता था , स्कूल जाने के पहले विविध भारती पर नए गाने जरुर सुनता था ! तब श्रीदेवी और जितेन्द्र के गीत आते थे - ' एक आँख मारू तो ...' ! फिर गिरफ्तार का गीत - धुप में न निकला करो ...रूप की रानी :)
रेडिओ संग यादों की बहार लौट आई है ...देर रात विविध भारती पर किसी कहानी में पिरोये गीतों की माला ...सुनते सुनते सो जाना ..ऐसे जैसे वो कोई सच्ची कहानी हो :) 
अब कार में रेडिओ सुनते हैं ! एफएम पर ! पहली दफा - तीन साल पहले - रेडिओ मिर्ची वालों ने बुलाया था - स्टूडियो में घुसते ही रोमांचित और भावुक हो गया ! चार घंटे - पुरे बिहार को अपनी पसंद के गीत सुनाया ! खूब मजा आया :) 

रात के सन्नाटे में ....जब पूरा गाँव सो जाता था ...तब भी कहीं किसी के घर से देर रात तक रेडिओ से गीत बजता था ...किसी ने कहा ..'नयकी भाभी' हैं ..बिना गीत सुने नींद नहीं आती है ...'नयकी भाभी' को देखने उनके घर पहुँच गए ..पर्दा से उनको झाँक ...भाग खड़ा ...उन्होंने ने भी प्यार से बुलाया - बउआ जी ..आईये ...:)

फिर से एक रेडिओ खरीदने की तमन्ना जाग उठी है ...बुश या फिलिप्स की ...हॉलैंड वाली :) रेडिओ कल्पना शक्ति बढ़ाती थी ...रेडिओ पर अचानक से बजने वाले पसंदीदा गीत ...रूह को तसल्ली दे जाते हैं ...अचानक से ....:))

@RR 2014 - 2017 

3 comments:

qayyum khan said...

बहुत सुंदर आलेख । पढ़कर बचपन की यादें ताजा हो आई।

badal pandey said...

No words to express my gratitude.heart touching.

Anonymous said...

बड़ी मिठास है इन मासूम यादों में...