Monday, September 22, 2014

चाँद यूँ खिला ....:))

सुबह होते ही चाँद ओझल हो जाता है ..और सूरज दिन भर खुद की आग में जलता है ....थक - हार ...चाँद के इंतज़ार में ...हर रोज सूरज ..हर शाम ढल जाता है ...
फिर ..रात में ..चाँद ..हर रात सूरज के इंतज़ार में ..निकलता है ...चाँद है ...वो भी थकने लगता है...पर धीरे धीरे..थोडा थोड़ा हर रोज मध्यम ...फिर अमावस्या की रात ओझल ...फिर हिम्मत बाँध ..अगले दिन ..चुपके चुपके ...थोडा ..थोड़ा ..फिर पूनम की रात ...सज धज के ...अपने सूरज के इंतज़ार है ...सूना है ..लोग कहते हैं ...वर्ष के वर्ष बीत गए ...ना वो थका ..ना ये हारा ...सलाम है ...@RR 5 November - 2012 

ए मेरे चाँद ...
ए मेरे फागुन के चाँद ...
आ ..अब धरती पर उतर आ ...
आ.. तेरे गोरे गालों पर थोडा अबीर लगा दूँ ...
आ.. तेरे नीले आसमां को और गहरा कर दूँ .
~ 16 March 2014 



आज पूनम की रात है ..सुना है चाँद हमसे बेहद करीब है ..उसे कुछ कहना है .हमें भी तो कुछ सुनना है ..आज की रात ना हम सोयेंगे ...ना ही हमारा चाँद सोयेगा ..सारी रात एक दूसरे को देखते रह जायेंगे ..मालूम नहीं फिर कब मुलाकात हो ...आज पूनम की रात है ..सुना है चाँद हमसे बेहद करीब है ..उसे कुछ कहना है .हमें भी तो कुछ सुनना है ..
@RR 
31 अगस्त 2012 

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