Thursday, February 5, 2009

कुछ सफ़ेद बाल !

जिंदगी इतनी व्यस्त हो गयी कि समय कैसे गुजर गया पता ही नही चला ! पिछले हफ्ता बालों को रंगने की कोशिश की ! ९ वर्षीय बेटा हंसने लगा ! मुझे भी अपना बचपन याद आ गया - बाबु जी पहली दफा बालों को सलून से रंग के आए थे और मंद मंद मुस्कुरा रहे थे - सच पूछिये तो उस वक्त मुझे अच्छा नही लगा था ! मन ही मन कहा था - बाबु जी को ऐसा नही करना चाहिए था ! पत्नी का जोर था सो मैंने भी बालों को रंग लिया ! कान के आस पास के बाल थोड़े उजले नज़र आ रहे थे - कई बार तो दिल को तसल्ली  दिया कि आइना झूठ बोल रहा है ! पर बकरे कि अम्मा कब तक खैर मनाती ! जब भी आईने अपने सफ़ेद को बालों को देखता और सोचता अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है ! कई शौक तो अभी छूछे ही हैं ! दिल अभी भी जवान है ! यूँ कहिये तो दिल अभी भी २४ वर्ष का ही है ! कई सालों से दिल कि उम्र बढ़ी ही नही ! पर शरीर ने तो अजब कि रफ़्तार पकड़ ली है ! दुःख होता है - भगवान् के नियम पर ! ऐसा नही होना चाहिए ! दिल और शरीर दोनों कि रफ़्तार एक होनी चाहिए ! हर वक्त कुछ सिखने का मौका मिलता है - अछ्छा लगता है ! सोचता हूँ - अगली बार गलती नही करूँगा ! पर , अब ऐसा लगता है कि अब अवसर नही आयेंगे ! जो हो गया सो गया ! यह सोच घबरा जाता हूँ ! अपने कई सपने और उम्मीदों को अपने बच्चों में देखने लगता हूँ ! शायद , बाबु जी भी यही सोचते थे ! कुछ लोग कहते हैं - बच्चों को आजाद कर दीजिए , उनको अपनी जिंदगी जीने दीजिए ! ऐसा कैसे हो सकता है ? मेरे कई सपने अभी अधूरे हैं - इनको कौन पुरा करेगा ? अपना खून ही , न ! क्या गुनाह है अगर अपने सपने को अपने खून कि नज़र से देखना चाहता हूँ ? बच्चे भी तो मेरे अपने ही हैं , न ! और सपने भी मेरे ही हैं !

@RR 

20 comments:

Mired Mirage said...

अपने सपने हम खुद ही पूरे करें, न कर पाएँ तो उन्हें सपने ही मान लें, बच्चों को नए सपने देखने दें, यही बेहतर है। यदि वे हमारे ही सपने जते रहेंगे तो अपने कब देखेंगे ?
घुघूती बासूती

MUKHIYA JEE said...

घुघूती बासूती जी , आदमी कितना स्वार्थी होता है , या फ़िर मै कितना स्वार्थी हूँ कि यह भूल गया कि बच्चों के भी ख़ुद के सपने होंगे ! शायद यह कहानी अधिकतर मध्य वर्ग परोवारों कि है जहाँ बच्चे अपने माता पिता के सपनों को अपना मान सब कुछ लुटा देने कि कोशिश करते हैं !

शोभा said...

हाँ ऐसा ही होता है। इतिहास अपने को दोहराता रहता है।

Upadhyayjee said...

बधाई हो। स्वागत है अपने जमात मे। बहुत सही लिखे हैं।
बाल तो छुप जाता है, दाढी कैसे छुपायेगें? ईंतजार रहेगा दाढ़ी के उपाय का।

Sanjay Sharma said...

बढ़िया लिखें है . बधाई !

रंजना said...

बचपन से बुढापे तक दिल जवान ही रहता है,उसकी उम्र सोच पर निर्भर करती है और उसीके हिसाब से यह घटती बढ़ती है....

पर बहुत सही लिखा है आपने......अपनी पिछली पीढे कि जिन बातों पर हमें ऐतराज होता था,आज हम बहुत कुछ वही कर रहे हैं और शायद हमारी अगली पीढी भी यही करेगी..

डॉ .अनुराग said...

उम्र दिखाने लगे आईने हमें
अब ये भी आजमाने निकले

MUKHIYA JEE said...

शोभा जी , उपाध्याय जी , संजय भइया , रंजना जी और अनुराग जी , आप सभी को "दालान" पर आना अछ्छा लगा ! उम्र के इस पड़ाव पर जो कुछ महसूस किया वोह मैंने लिखा ! आप सभी यूँ ही "दालान" पर आते रहे - मेरी यही मनोकामना रहेगी !

Yuva said...

Nice Post...!!-------------------------------------------
''युवा'' ब्लॉग युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अभिव्यक्तियों को सार्थक रूप देने के लिए है. यह ब्लॉग सभी के लिए खुला है. यदि आप भी इस ब्लॉग पर अपनी युवा-अभिव्यक्तियों को प्रकाशित करना चाहते हैं, तो amitky86@rediffmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं. आपकी अभिव्यक्तियाँ कविता, कहानी, लेख, लघुकथा, वैचारिकी, चित्र इत्यादि किसी भी रूप में हो सकती हैं.

Jivitesh said...

एक और बहुत ही अच्छी कृति ....पढ़ के अच्छा लगा . लेकिन मैं थोड़ा आश्चर्यचकित रह गया की ...रंजन सर के भी बाल पाक गए . अभी कुछ दिनों पहले तो आप काफ़ी स्मार्ट होते थे अपने सुंदर बालों के साथ.....:-)

समय इसी तरह बढ़ता जाता है , लेकिन जहाँ तक मैं मानता हूँ - बच्चों को भी खुशी होती है अपने साथ साथ अपने माँ पिताजी के सपने जीने में. मैंने यह महसूस किया की अगर आप उनके छोटी खुशियों का ख्याल कीजिये ..तो उन्हें लगता है की उन्होंने आच्छे बीज बोए थे. और इस वजह से हमारे सपनों पे कोई फर्क नहीं पड़ता.

MUKHIYA JEE said...

Jivitesh , I like the way you respond as a son of a father . Keep it up !
Thanks for appreciating my writings :) Be a regular visitor of the group . How is ur job ? Mail in leisure hours !

anil said...

Ranjan ji, Visited your blog after few months to read all new writings which have come in between from my last visit. Hair white ho rahe hain to jyada tension ki baat nahin hai...I have seen white hairs of students of secondary or higher secondary... Anyway probably you wanted to tell us that you are feeling that you are getting old...Recently was feeling very bored staying forced bachelor life here in Finland, so downloaded all 94 episodes of Mahabharata from Internet and have started watching them... I could not understand many dialogues or meanings in childhood but I think its worth watching for anyone in post 25+ age or more... I will recommend you to watch that old serial again...You will get many answers of your questions if you concentrate on dialogues... I can also suggest that keep doing your duty of fatherhood but do not expect anything from kids(Karm kiye jaiye fal ki icha mat rakhiye kyunki ki fal to aapke haath me hai hi nahin...aapke haath me aapka karm hai...) Pata nahin aane waale time me samaz ki kya ruprekha hogi aur next generation kaise honge, is liye main to yahi kahoonga ki jyada expectation rakhna hi nahin chahiye kyun ki expectation ya sapne tootne pe dookh bhi ho sakta hai...

Ajit Chouhan said...

ka sir ,khwab ka bhi detail thora digie aagla post mein :D

रंजना [रंजू भाटिया] said...

वक्त यूँ ही चलता है .. और ख़ुद को दोहराता है ..अच्छा लिखा

Fighter Jet said...

bahut hi sahi likha hai....par mera manna hai..dil jawan hai to sarir bhi jawan hai.. :)

Ranjeet Kumar said...

Lets not put our "sapne" to our children...apne babuhi ki galtiyon ko kyon duhraya jaye..lets stop..unko apne sapne pure karne dijiye..nahin to aadhi zindagi hamare sapne pure karne aur fir baki zindgi me apne sapne pure nahin kar paayenge..

C-MANTRA said...

yahi to ek sachaaye hai sir ke "zindgi main koi U turn nahi hota hai..........."

rashmi singh said...

nice!!!bahut khoob!!!!

Krishna said...

रीति काल के प्रसिद्ध कवि केशवदास जी ने अपने सफ़ेद बालों के कारण पनघट पर पानी भरने आयी युवतियों द्वारा बाबा कहे जाने पर बहुत उदास हो कर ये कहा था...
केशव केसन अस करी, जस रिपु ही न कराहीं
चन्द्रवदन मृगलोचनी, बाबा कही कही जाहिं

युग, और समय बदला है पर युवा दिखने की ललक अभी भी वही है...इस लिए चिंता की कोई बात नहीं है रंजन जी.....:)

sonu said...

ye kehna asaan hai par shayad hum mansik roop se itne majboot nhi huye ghughuti basuti jee,
mai hamesha yehi sochta hu k jo mai nhi kar paya mera bhai use pura kre aur wo nhi krega to sayad ye umeed apne bacho se ho jayegi ye ajeeb sa hai pr hota hai