Monday, August 15, 2016

स्वतंत्रता दिवस - रंजन ऋतुराज के कुछ लेख


देश क्या है ? क्या है हमारा इसके साथ भावनात्मक सम्बन्ध ? करीब दस साल पहले मै सीतामढी के एक बहुत ही बड़े रईस एवं विद्वान श्री सरदेंदू बाबु के पटना आवास पर उनके साथ बैठा था - बातों बात में पता चला - वो आज़ादी के समय अमरीका से स्नाकोत्तर एवं पीएचडी कर के आये थे - कहने लगे - चार साल बाद जब दिल्ली एअरपोर्ट पर उतरते ही - धरती से लिपट गया ! 
सन चौरासी में शायद - राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे - श्रीमती गांधी से उनकी बात होने वाली थी - श्रीमति गांधी ने पूछा - कैसा लग रहा है अपना भारत ? राकेश शर्मा बोलने लगे - 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा' - आप में से कईयों को यह याद भी होगा ! 
आज सुबह सुबह जी न्यूज पर देखा - सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में तिरंगा के साथ - स्वंतंत्रता दिवस मना रही थी - विंडो से धरती को देख 'भारत' को खोज रही थी - अदभुत ! 
आप किसी को यह नहीं कह सकते - कोई कम देशभक्त है - हर किसी की अपनी क्षमता है - अलग अलग सिचुयेशन है - कोई सैनिक बन के सीमा पर लड़ता है - कोई डाक्टर बन के ओटी में - मेरे एक मित्र हैं - विदेश में रहते हैं - २५ जनवरी / १४ अगस्त देर रात चैट पर जरुर बोलते हैं - 'अपने बच्चों को मेरे तरफ से तिरंगा खरीद देना और बोलना चाचा की तरफ से है ' - भावनाओं में भींगे इन शब्दों को हम किस तराजू में तौल सकते हैं ? 
अमरीका में सदा के लिए बस गए मेरे एक वैज्ञानिक मित्र कहते हैं - जिस दिन वहाँ का नागरिकता मिला - जो कुछ मुझे शपथ में बोलना पड़ा - कई महीनो रोज रात रोता रहा - 
कोई यह कैसे कह देगा - तुम देशप्रेमी नहीं हो ....हमसभी अपने देश को उतना ही प्यार और इज्ज़त देते हैं - जितना की दूसरे मुल्क वाले - कौन कहता है - देश बंटा हुआ है ? ए आर रहमान को ऑस्कर मिला - टीवी देखते देखते - कुर्सी से उठ गया था - कब यह ख्याल आया की वो मुस्लिम हैं या तमिल ? 
देश ...देश है ....इस प्रेम को किस तराजू पर तौलें ! 
देश विदेश की बात छोडिये ...आज तो सुनीता ने अंतरिक्ष में अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया ....
क्या अब भी मन नहीं भींगा ....
जय हिंद ! 


~ 15 Aug / 2012 

पिछले कुछ साल में - इंटरनेट के माध्यम से हज़ारों लोगों के बात चीत और उनके मनस्थिती को समझते हुए यही पाया हूँ की - देश या इस देश के इंसान अभी भी व्यक्तिवाद के पीछे पागल है ! मेरी यहाँ पर दूसरी राय है ! 
मैंने हमेशा संस्था को महत्वपूर्ण समझा है ! उस संस्था के शिखर पर बैठा इंसान का बहुत हद तक महत्व नहीं है क्योंक्की जब वह संस्था मजबूत होगी - कोई भी आये या जाए - बहुत फर्क नहीं पड़ता है ! 
परिवार से लेकर विश्व तक - हर एक नेतृतव का यह धर्म है की वह संस्था को मजबूत बनाए ! अम्बेडकर नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा बनाई गयी संविधान ही है की - कभी एक अर्थशास्त्री भी देश का मुखिया बन जाता तो कभी एक घोर दक्षिणपंथी ! आप पुरे देश को गौर से देखियेगा तो - यह देश इतना मजबूत ही की नेतृतव परिवर्तन से बहुत हद तक बहुत फर्क नहीं पड़ता ! अगर आस पास के दुसरे देशों को देखें तो वहां नेतृतव परिवर्तन के साथ एक भूचाल आ जाता है ! कारण यह है की - संस्था मजबूत है ! 
कई बार एक मजबूत नेतृतव संस्था को मजबूत बनाने के बदले उसे कमज़ोर भी करने लगता है - कई राज्य जहाँ ऐसे मुख्यमंत्री बने वह इसके गवाह है ! पर संस्था इतनी मजबूत होती है की - एक हद के बाद वह खुद नेतृतव को बदल देती है ! 
हम आज है - कल नहीं ! देश कल भी था , देश आज भी है और देश कल भी रहेगा ! सवाल यही है - हमारा योगदान कितना है - हम इसे कितना मजबूत बना पाते है ! वही इतिहास होगा - वही भविष्य होगा ! 
जय हिन्द !


नेतृतव से भी बड़ा संस्था और संस्था को चलाने वाला सिस्टम होता है ! सिस्टम को बनाना , बिगड़ना , ट्यून करना इत्यादी ही नेतृतव का काम होता है ! 
एक उदहारण देता हूँ - घर में कोई एक अग्रज पढ़ाई लिखाई का सिस्टम बनाता है - उसकी जैसी सोच - फिर जब सिस्टम बन जाता है - घर का बच्चा खुद ब खुद पढ़ लिख कर आगे बढ़ जाता है ! उसी मेरिट का बच्चा किसी दुसरे तरह के सिस्टम में कुछ अलग रिजल्ट देगा ! 
लालू राज के दौरान - बिहार में सिस्टम चौपट होने लगा था ! भाजपा के समर्थन से नितीश जी ने नेतृतव संभाला और बहुत वर्ष लग गए उस सिस्टम को सुधारने में ! नितीश एक दिन में कोई नया और बड़ा सिस्टम नहीं बना दिए ! वो उसी सिस्टम से काम लिए जिसे लालू जी ने जंग लगा के रख दिया था ! हाँ , सिस्टम को सुधारते वक़्त कई बार आप उसमे अपने तरफ से भी योगदान करते हैं पर समय के साथ बहुत बड़े बन चुके सिस्टम में आपका योगदान बहुत छोटा होता है ! 
कई बार नेतृतव यहीं भूल कर बैठती है ! उसे लगता है वह है तभी सिस्टम है या वह सिस्टम से ऊपर है ! इसी लाल किला प्राचीर से पिछले साल मोदी जी ने 'स्वच्छता अभियान' की घोषणा की पर मेरा यह मानना है की इस अभियान को सफल बनाने के लिए उन्होंने सिस्टम को ठीक नहीं किया या फिर कोई सिस्टम नहीं बना सके ! हो सकता है उनके भक्तजानो को बुरा लगे ! पर इस सोशल मिडिया के काल में - लोग बहुत तेजी और बहुत पारदर्शिता मांग रहे हैं ! 
एक देश / राज्य के नागरिक होने के नाते - वर्तमान में एक गैर राजनीतिवाला होते हुए - मै चुनी हुई सरकार पर उंगली उठा अपने ओछापन को नहीं दर्शा रहा बल्की उन्हें सिस्टम में सुधार या मनमुताबिक बनने को कह रहा हूँ ! हाँ , समय लगेगा पर यह बात हर किसी को समझ में नहीं आता है और लोगों को समझाना भी आपके सिस्टम का काम है !


~ 15 Aug / 2015 
@RR