Tuesday, April 21, 2009

चुनाव और लगन !!

बिहार में चुनाव और लगन दोनों का जोर है ! छपरा जिला के लौंडा के नाच और पटना के चुनाव - दोनों में कोई फरक नहीं नज़र आता है - मुझे ! अजीब हाल है - पढ़ा लिखा , नौकरी पेशा वाला जात को बस "नचनिया - बजनिया " ही अपना नेता नज़र आता है ! ये चुनाव नहीं जिद है ! दुःख होता है - चुनाव को जिद की तरह लड़ा जाता है !
बचपन का दिन याद है - चुनाव में "खड़ा" कैसे हुआ जाता है - समझ में नहीं आता था - फिर लोग चुनाव में "बैठ" कैसे जाता है ? कौंग्रेस और इंदिरा गाँधी पसंदीदा थी ! अब कभी कभी टी वी वाला सब इंदिरा गाँधी का विजुअल दिखता है तो बचपन याद आ जाता है !
चौधरी चरण सिंह ने एक बार कहा था - देश का प्रधान मंत्री - वही बन सकता है - जो दिल्ली में रहेगा ! बाबु जी हमको दिल्ली भेज दिए ! यहाँ त अजब का हिसाब किताब है - कोई नेता १००-२०० करोड़ से कम का अवकात ही नहीं रखता है ! कल रविश भाई का स्पेशल रिपोर्ट देख रहा था - मंत्र मुग्ध हो गया - रविश भाई पसंदीदा हैं - लेकिन अंत में जब वोह बिहार और अपनी जात का दरद - अपनी लेखनी में लिखते हैं तो दुःख होता है - ऊंचाई के साथ साथ आपको बहुत कुछ छोड़ना होता है ! खैर !
पहला चरण के बाद - लालू जी को पसीना आ गया फिर क्या रातों रात , कल तक उनका जूठा खाने वाले पत्रकार भी बदल गए ! नीतिश भी वैसे पत्रकारों को आँख तरेर दिया ! अब मरता दलाल - क्या न करता :(
लेकिन प्रधान मंत्री कौन बनेगा ? देवेगौडा जैसा प्रधानमंत्री बनाने से अच्छा है की साल भर के अन्दर दूसरा चुनाव ! सवाल और भी हैं ? अडवानी बाबा का क्या होगा ? उनका पार्टी का क्या होगा ? कुकुर के भांती सब लडेगा ! डूब जायेगा ! और भारतीय राजनीती को सियार सब खा जायेगा !


रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !

4 comments:

Shiv Kumar Mishra said...

भारतीय राजनीति को अभी भी सियारे खा रहा है? रविश जी से कहकर एगो शोध करवाइए न कि सुअर पहिले ही खा चुके न अभी ऊ सब का नम्बर आना बाकी है.

उपाध्यायजी(Upadhyayjee) said...

एक बात तो है. जहाँ तक मीडिया का पहुच नहीं हैं वहां पर चुनावी मुद्दा असल है जैसे की महंगाई, बेरोजगारी, कीमत इत्यादि. जहाँ मीडिया पहुच गयी है वहां उन मुद्दों को भूलकर मंदिर, मस्जिद, कंधार, पाकिस्तान, वरुण ये सब मुद्दे बने हुए हैं. लेकिन बात सच ही है सियार ही पहुचेंगे. इस बार का चुनाव का परिणाम देखने लायक होगा. और चुनाव के बाद बनती बिगड़ती गठबंधन भी मजेदार होंगे.

Udan Tashtari said...

सियार खायेगा बाकी सब ताली बजायेंगे.

Sanjay Sharma said...

लालू का बिहार से जितना जरूरी है बिहार की तरक्की के लिए . हार कर बिहार में रहेगा तो खुराफात ही करेगा.
वैसे उसकी पार्टी और रामविलास की पार्टी दोनों पानी पीता नज़र आ रहा है .