Tuesday, October 25, 2011

टीए - डीए का खेला ...

बचपन याद है ! बाबा सहकारिता आंदोलन के अपने क्षेत्र के अग्रणी नेता थे - सो - बिहार स्तर के कई सहकारी संस्थाओं में प्रतिनिधि थे ! साल में दो तीन बार सबकी मीटिंग होती थी - बिस्कोमान , सहकारी बैंक , भूमि विकास बैक इत्यादी ! बाबा की लाल बत्ती वाली गाड़ी में मै भी बैठ कर इन मीटिंग में पहुँच जाता था ! वहाँ एक लंबा लाईन लगा होता था - सामने एक आदमी बैठ होता था - जो एक अटैची और एक पैकेट देता था ! अटैची में कागज पत्र होते थे और पैकेट में कुछ सौ रुपये ! अटैची मै लेकर कार में रख देता था और पैकेट बाबा अपने पॉकेट में ! बाद में अन्य जिला से आये लोगों से उनको बात करते सुनता था - टीए कम दिया है ! डीए एक दिन और का मिलना चाहिए था - ब्ला..ब्ला ! हम ज्यादा माथा नहीं लगाते - दोपहर को पसंदीदा मुर्गा भात खाने को मिलता - तपेश्वर बाबु हर टेबल पर् पहुंचते और सबसे हाल समाचार पूछते ! इन्ही एक मीटिंग में बिस्कोमान भवन के निर्माण के मंजूरी मेरे आँखों से मिली थी ! इन्ही मीटिंग में एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व० बिन्देश्वरी दुबे को मुर्गा का टांग दोनों हाथ और दांत में दबाये हुए अखबार में फोटो छाप दिया था ! :) सब याद है - हमको ! वो मेरा स्वर्णीम काल था ! अब गदहा काल है :( खट रहे हैं :( 

हाँ तो बात हो रही थी - टीए डीए पर् ! बाबु जी वर्तमान में पटना के एक कॉलेज में विभागाध्यक्ष हैं - प्रैकटीकल परीक्षा में एग्जामिनर बाहर से आते हैं ! बिहार सरकार / कॉलेज / विश्वविद्यालय का जो हाल है वो किसी से छुपा नहीं है ! वैसे परीक्षक जाते वक्त 'टीए - डीए' को लेकर कुछ हल्ला नहीं मचाये सो बाबूजी को अपने पॉकेट से ही देना पड़ता है ! 

हम भी शिक्षक हैं ! दूसरे कॉलेज में प्रैक्टिकल परीक्षा लेने जाना पड़ता है ! परीक्षा खत्म होने के बाद - भारी हंगामा होता है ! टीए - डीए को लेकर हम तो चुप ही रहते हैं लेकिन बाकी लोग तो ऐसा करते हैं - जैसे उनका कोई हक मारा जा रहा है ! आयेंगे मोटरसाइकिल से टीए मांगेंगे - कार का ! एकाउंटेंट पूछ बैठेगा - कार नंबर दीजिए - बाहर पाकिंग से किसी का नंबर लिख देते हैं लोग ! एकॉन्टेंट हडकाता है - सरकार का पैसा है - जेल चले जाईयेगा ..ब्ला ब्ला...कौन उसकी बात सुनता है ! 

यही हाल कॉपी जांचते वक्त होता है ! उपरवाले की मेहरबानी से बड़ी कम उम्र में हेड एग्जामिनर बनने का मौका मिला ! बाकी के परीक्षक माथा नोच लेते थे - सर , एकॉन्टेंट बहुत बदमाश है - दो दिन का का डीए काट लिया ! सेन्ट्रलाईज कॉपी चेकिंग होती हैं ! भारी हेडक हो जाता है ! प्रोफ़ेसर को लेक्चरर वाला डीए मिल गया - हुआ हंगामा - बोला - इज्ज़त चला गया ! हम बोले भाई - दस - बीस रुपैया से क्या बिगड जायेगा ! प्रोफ़ेसर बोलेगा - आप नहीं समझियेगा ..ब्ला ..ब्ला ! 

कुल मिलाकर मेरी समझ में यही आया की - नौकरी करने वाला - टीए डीए को जन्मसिद्ध अधिकार समझता है - होना भी चाहिए - कंपनी / सरकार के काम से आप जा रहे हैं तो खर्चा पानी तो लगेगा ही ! हम भी गाँव में अपना नौकर को कहीं काम से भेजते हैं तो खर्चा देते ही थे ! लेकिन जब वो नौकर खर्चा में से कुछ बचा कर वापस कर देता था - मन एकदम से गद गद् हो जाता ! 


अब आईये - किरण आंटी पर् ! एक एनजीओ से पैसा उठाकर दूसरे एनजीओ को पैसा देना - गलत है ! सीधे  चंदा मांग लेती ! दरअसल आदत खराब है ! यह विशुध्ध पाकिटमारी है ! आप इतनी ईमानदार थी फिर 'मिजोरम' से क्यों भागना पड़ा ? आप सभी मीडिया की देन हैं और याद रखिये यही मीडिया आपके चमक  को  खत्म भी करेगा ! आपके जैसे हर स्टेट में दस आई पी एस अफसर हैं ! मीडिया मैनेज ही सब कुछ होता तो - भाजपा के रविशंकर प्रसाद को राज्यसभा में नहीं जाना पड़ता - लोकसभा में जाते ! आपने क्या काम किया जिसके लिये - आप खुद को राष्ट्रिय स्तर की नेता खुद को समझाने लगीं ! बस 'अन्ना' मिल गए - सब कूद गए ! 

जिस लोकसभा को आपसभी रामलीला मैदान में नौटंकी कर के क्या क्या नहीं कहा - आज उसी लोकसभा में बैठने के लिये - सबकुछ मंजूर है ! टीवी पर् देश के प्रधानमंत्री का मजाक उडाना कहाँ तक सही था ! उनकी मीमीकरी करना ! क्या यह सब एक पूर्व आईपीएस को शोभा देता है ! अवकात में रहिए ! हम भी बिहार से आते हैं जहाँ हर मोहल्ले से दो सिविल सर्वेंट होते हैं ! पर् आप जैसा किसी को नहीं देखा ! हाँ , कॉंग्रेस गलत है ! पर् देश का संविधान उसको पांच साल शासन का अधिकार दिया है - कोई गलत नहीं है ! मैडम , बहुत आसान है - दिल्ली के किसी क्षेत्र को रिप्रेजेंट करना ! देहाती क्षेत्र में बुखार छूट जायेगा ! बेटी की शादी में दो क्विंटल चीनी मांगेगा ! कोई अपने बेटा को नौकरी के लिये कहेगा ! कोई भूख मर जायेगा ! 

हिम्मत और अवकात है तो - देश का कोई पिछड़ा क्षेत्र से खुद को लोकसभा का उम्मीदवार घोषित कीजिए - चुनाव जीतिए और वहाँ की जनता के दर्द को समझिए ! टीवी पर् बोलना बहुत आसान है ! चार एंकर / न्यूज रीडर से दोस्ती कर - किसी चैनल पर् बोंल लेना आसान है ! असली जनता के बीच रहना आसान नहीं है , मैडम ! 

और आप केजरीवाल जी , याद है ..रँजन ऋतुराज का नाम ? नहीं याद होगा ! सत्येन्द्र दुबे हत्या कांड के बाद के जन्मे ग्रुप में ही आपका जन्म हुआ था ,ज्यादा नहीं लिखूंगा क्योंकी आपका भी इज्जत दो पैसा का हो गया है ! आई आई टी का सीट आपने खराब  किया - फिर सिविल सर्वेंट भी सही ढंग से काम नहीं किये - अब फ्लाईंग शर्ट को ऊपर से पहन - देश के सबसे ईमानदार बन् गए ! हद्द हाल देश की मिडिल क्लास का ! 

लोकपाल क्या कर लेगा ? दस लाख जनता से आप एक एम पी को चुनते हैं ! कभी किसी एम पी के घर गए हैं ? जितना आपके तनखाह है उतना का लोग उसके घर चाय पी जाता है ! कहाँ से लाएगा वो पैसा ? हर लगन में लाखों रुपैये के नेवता बंट जाता है ! कौन देगा ? 

देश के सबसे बेहतरीन दीमाग को आप सिविल सर्वेंट बनाते हैं - देते क्या है - उसको ? पांचवे वेतनमान में - तनखाह थी - आठ हज़ार बेसिक ! अब है पन्द्रह हज़ार बेसिक ! उसका बच्चा भूख रहे और आपलोग ? दो महीना जावा सीख लिये और पचास हज़ार कमाने लगे ! 

जितना लोग हल्ला करता है - इंटरनेट की दुनिया में - सबसे ज्यादा ट्रैफिक रुल वही तोडता है ! सुबह में ट्रैफिक रुल तोडेगा और शाम को इंटरनेट पर् 'अन्ना - अन्ना' चिल्लाएगा ! गजब का चमड़ी है ! मै गुस्सा में हूँ - मुझे तीन किलोमीटर का सफर ऐसे कार वालों के कारण एक घंटा लगाना पड़ता है ! हद्द हाल है ! 

दिन में फेसबुक पर् 'अन्ना - अन्ना' चिल्लाएगा और शाम को बेटा बेटी के एडमिशन के लिये स्कूल के दलाल के घर जायेगा ! मत जाओ ..ना ! सेना की नौकरी सबसे बढ़िया - पर् वहाँ जायेगा - कौन ? पड़ोसी का बेटा ! हाय रे ...मिडिल क्लास ! 

एल पी जी में सब्सीडी क्यों ? डीजल में सब्सीडी क्यों ? शर्म नहीं आती ? - डीजल कार खरीदते वक्त ! आज दिल्ली - मुंबई जैसे शहर में डीजल कार पर् आठ आठ महीना का लाईन है ! डीजल का सब्सीडी किसके लिये है - मेरी जान - मिडिल क्लास ? 

भारत में भ्रष्टाचार खून में है ! हीरा चोर - खीरा चोर को पिटता है ! कई ईमानदार लोग भी कई गलत काम कर बैठते हैं - हक समझ कर ! 

अब कितना लिखा जाए ! कानून भी दोषी है ! 

माथा खराब है !

रंजन ऋतुराज - इंदिरापुरम !

8 comments:

Ajit Singh said...

हीरा चोर - खीरा चोर को पिटता है...ranjan bhai iss hamam mai saare ooper nange hai bus mauke aur samay ki baat hai.....bechara Cattle Class kya karega.

Brajesh Singh 'Arahaan' said...

"देश के सबसे बेहतरीन दीमाग को आप सिविल सर्वेंट बनाते हैं - देते क्या है - उसको ? पांचवे वेतनमान में - तनखाह थी - आठ हज़ार बेसिक ! अब है पन्द्रह हज़ार बेसिक ! उसका बच्चा भूख रहे और आपलोग ? दो महीना जावा सीख लिये और पचास हज़ार कमाने लगे"
Jameeni Haqeeqat Ko Saamne Rakh Diya Hai Aapne.

Aur Jo Anna Hazare Ka Prasang Aapne Chhedaa Hai Wo Bahoot Pasand Aaya. Log Bahti Ganga Me Haath Dhone Me Hamesh Aage Rahte Hai. Main Anna Hoon Main Anna hoon Ka Naara Lagate Hain Sadkon par, Aate Jaate Logo Ko bhi Kathit Bhartiyata Dikhane Ko majboor Karte Hain Aur phir Jab Police Pakadti hai to dus bees deke bahar, aur phir agle roj anna samarthan ke liye naya morcha.


Bahoot Badhiyaa Laga Aapkaa ye Post.

Anonymous said...

रंजन जी, सबसे पहले तो आपको इस उत्क्रिस्ट लेख के लिए बहुत - बहुत धन्यवाद्. अरविन्द केजरीवाल को अप्पने बिलकुल सही तरीके से समझाया है, क्या जरूरत थी उनको इस देश में आन्दोलन चलने के लिए वो भी नौकरी करते -बढ़िया पच्कागे पते और राजधानी में कही फ्लैट लेके आनंद पूर्वक रहते और दुसरे लोगो पर ब्लॉग लिखते. बिलकुल सही रंजन ऋतुराज जी.
आपने आईएस के बारे में भी बिलकुल सही लिखा है, बेचारे लोगो को सिर्फ १५ हजार में ही गुजरा करना पड़ता है और तो सर्कार से कुछ मिलता है नहीं. कही आने जाने के लिए बेचारे लोग को पब्लिक बस में आना जाना परता है.
और दो महीने में जावा सिख के लोग ५० हजार -१ लाख कमाते हैं. उसके बाद भी जावा वालो को गवर्नमेंट की तरफ से कितना कुछ मिलता है गैस कनेक्शन तुरत, आवास , बिजली , पानी सब कुछ मुफ्त में मिल जाता है जावा वालो को बिलुकूल सही फ़रमाया है आपने रंजन ऋतुराज सिंह जी
आपका ही एक पटनिया भाई
पंकज प्रवीन

Anonymous said...

Likhte toh accha hain aap, par hain Ghor samantwadi.. Feudalistic ideals run deep in ur thoughts.. So when u were having chicken on government money, it was heaven.. Now when u have earned everything as per your own account by proving yourself in a competitive scoiety, it's hell.. The chai-neuta parallel which you have drawn is particularly hillarious..

It's a misfortune of our mother state that even it's meritorious and educated sons think like feudals of the 19th century..

Anonymous said...

desh ke behtareen dimag civil servant nahin bante, unhe lagta hai ki unhe bhi chori chakkari karni padegi.....

Anonymous said...

एक असंतुलित लेख. लेखक बोलना क्या चाह रहे हैं समझ में नहीं आया. मीडिया ने किरण आंटी को ही क्यों बनाया "सोचने वाली बात है". वैसे बहुत से पढ़े लिखे लोग सब्सीडी हँटाने के पक्ष में है. परन्तु मुश्किल ये है की "सो काल्ड" अमीर लोग जिसका तनख्वा ३२ रु. रोजाना है १००० रुपैये में गैस खरीदेंगे कैसे. थोड़ा ये सोचिए यदि केजरीवाल ने नौकरी नहीं छोड़ा होता तो आपको ये ब्लॉग लिखने का मौका कैसे मिल पाता. और बिना सामने वाले की मर्जी के मनचाहा रूप में इमेल के जरिये जो स्पैम करते हैं वो कैसे होता. वैसे मन तो आपका भी करता होगा जावा सीखने का. लेकिन आप क्या करिएगा. सीविल सर्विसेज के "कर्मठ संत" लोग जब गिरते हैं तो सीधे मास्टरी पर पहुंचते हैं. उनको बीच में जावा दिखता नहीं है. वैसे मास्टरी में मजा ही कुछ और है... ना कोई काम-धाम, ना कोई जिम्मेदारी. और मुफ्त का दरमाहा. क्या आपने कभी सोचा की २ घंटे में जो लेख आपने लिखा उससे आपको आ किसी और को क्या फ़ायदा होगा. भरी जवानी में "समय खराब" करना देश द्रोह है. आपने किरण वेदी को चुनौती दिया है की हिम्मत है तो पिछड़ा इलाका से चुनाव लड़ के दिखाए. यदि आप में हिम्मत है तो इस टिप्पणी को यहीं पर रहने दीजिए. डीलीट मत कीजिए. ...उमेश

Arun K Mishra said...

We said ..... "हीरा चोर - खीरा चोर को पिटता है ! कई ईमानदार लोग भी कई गलत काम कर बैठते हैं - हक समझ कर !" but when you pose a problem give solution... I mean...... how to clean the blood?
Arun Mishra

Arun K Mishra said...

Umesh ji,

Opinion dena aur us par amal karna dono alag alag baat hai.... e.g. is e.g. don't take otherwise.

Brajesh Bhai
"देश के सबसे बेहतरीन दीमाग को आप सिविल सर्वेंट बनाते हैं" I do not agree.... Only Doctor, Engineer or sometimes ... individual select his/her career.... "Babu" to "Babu" Hai Bada Babu ya Chota......

Remember... a person qualifies Civil Services to take bribe... and dawery?????

Its my view...
Regards
Arun