Tuesday, February 22, 2011

मेरा गाँव - मेरा देस - मेरा स्कूल अलुम्नी मीट - पार्ट १ :))

भैया लोग ( सीनियर ) 
भयवा ( बैचमेट )
भाई लोग ( जूनियर ) 

हैंगओवर क्या होता है ? वो आज हमको बुझा रहा है ! परसों  मेरे स्कूल का अलुम्नी मीट था - नई दिल्ली में ! क्या कहूँ ..और क्या न कहूँ ...यादों की बारात अपने आप में एक याद बन् के रह गयी ! बिना शराब पिए हुए - हैंगओभर ...
चलिए कुछ पृष्ठभूमी बताता हूँ ...( भाषा पर् गौर मत फरमाईयेगा ) 

सन 2005 में 'नरेन्द्र जी' ( 88 बैच ) मिलने के लिये आये ! उनदिनो मै सेटर बासठ - नॉएडा में रहता था ! उनदिनो घर के लोगों के बीमार रहने के कारण करीब २ साल से परेशान था ! बात आई गई हो गयी ! इस बीच पटना में स्कूल मीट होता रहा - पिछला साल दिसंबर में जाने का बहुत मन था - पर् 'नौकरी' के कारण नहीं जा सका ! खैर .....

इसी बीच 'फेसबुक' पर् नरेन्द्र जी अचानक प्रकट हुए और वो स्कूल अलुम्नी मीट - दिसंबर - पटना गए ही नहीं अपने तरफ से वहाँ "कनट्रीब्यूट" भी किया और हम दोनों के बीच बात हुआ की - हम लोग किसी शनीवार मिलेंगे ! एक शनीवार वो आये - जनवरी में - हम दोनों "कुछ यहाँ भी करना है" पर् बात कर ही रहे थे की उनके बैच के दो और लोग आ गए - सुजय जी ( लोकसभा पदाधिकारी ) और आनंद वर्धन ( राष्ट्रीय सहारा ) ! बस एक छोटा सा अलुम्नी मीट हो गया :))फिर अशोक अगरवाल भैया ( 1979 )  दिल्ली में थे तो हमको और नरेन्द्र जी को बुलाहट  हुआ और जल्द से जल्द नई दिल्ली मीट पर् आगे बढ़ने का बात हुआ - वहाँ उनके बैच के भारतीय विदेश सेवा के 'शम्भू अमिताभ' भैया , आई आर् एस दीप शेखर भैया , बिहार निवास में इंजिनीयर - पद्म कान्त झा भैया , एल आई सी के सुनील भैया इत्यादी से मुलाकात हुई ! फिर निर्णय हुआ की - अब बस स्कूल अलुम्नी मीट करवा देना है ! कुछ जगहों का वो सब निर्णय भी कर लिये ! मेरे लिये तो आज भी 'दिल्ली' अन्जान ही है - नरेन्द्र जी से अगले दिन से बात होने लगी - लगभग हर शनीवार - इतवार वो जगह खोजने लगे ! अंत में ..स्कूल के ही और नरेन्द्र जी की तरह ही सुप्रीम कोर्ट के वकील - "रँजन पांडे " भैया ( 1985 ) ने स्पोर्ट्स क्लब बुक करवा दिया - नरेन्द्र जी का फोन आया - जगह बुक हो गया - अब "रेस" हो जाईये :)) अब रेस होना था - कैसे रेस हुआ जाए :( मेरे जैसा आदमी के लिये भारी टेंशन :(  हम दोनों लगभग हर शनीवार मिलने लगे ...

Gardenia India Limited  वाले बिहार के ही हैं और मेरे जान पहचान के हैं - उन्होंने बोल रखा था - "रँजन जी , आपसे पुराना परिचय है - जब कभी भी आपको बिहार से जुड़े किसी भी कार्यक्रम को करना है - संकोच नहीं कीजियेगा - जितना संभव हो - मै मदद करूँगा" ! फिर भी मेरे लिये ये कष्टदायक था ! एक दिन उनलोगों से मिला और बोल दिया ! फिर एक दिन उनको फोन किया - वो बोले की आप मेरे गाज़ियाबाद वाले ओफ्फिस चले जाईये - एकाऊँन्टेंट को बोल दिया हूँ ! हम और नरेन्द्र जी वहाँ पहुंचे - मै अंदर गया - थोडा संकुचाये हुए - कुछ बोला -  एकाऊँन्टेंट ने दे दिया और हम नरेन्द्र जी को ! हम दोनों कनफीडेंस में आ गए ! अगले दिन 'रँजन पांडे' भैया भी कुछ नरेन्द्र जी को दे दिए ! नरेन्द्र जी ने करीब एक सौ बीस लोगों के लिये - क्लब वाले को पैसा जमा करवा दिए ! डेट फिक्स हो गया - बीस फरवरी - रविवार ! 

अब हम लोग टेकनौलोजी का प्रयोग शुरू किये ! इसी बीच नीरज आनंद भी जुड गए - वो नरेन्द्र जी के ही बैच के  हैं ! नरेन्द्र जी को अपने बैच , दुबे भैया , रँजन पांडे भैया पर् पूरा  विश्वास - हर बार वो कहते - ऋतुराज जी , घबराईये मत ! इस बीच मेरी बात हुई - रँजन पांडे भैया से - बोले ...तुम्हारा ब्लॉग तो पढ़ लिया - बढ़िया लिखते  हो ..मै मुंबई निकल रहा हूँ ...तुम और नरेन्द्र देख लेना ..."लह" ...मेरे मुह से पटना स्टाईल में निकल गया ..हा हा हा 

कुछ लोगों का पता / फोन पटना से दीपक जैसवाल भैया और संजय भैया से मिला ..संजय भैया हर दो दिन पर् एक दो नंबर  भेज रहे थे ...नरेन्द्र जी अपना डायरी में नोट कर रहे थे ..इधर हम भी ...मेरे पास पचास लोग का डाटा तैयार हो गया ..नरेन्द्र जी के पास भी ..दोनों को मर्ज किया गया ..संख्या करीब डेढ़ सौ पहुँचने लगी ...अब काम होना था ..सबको "फोन " करना ..एक दिन नरेन्द्र जी सुप्रीम कोर्ट से ही मेरे पास आ गये ..हम दोनों बैठ कर एक एक कर के बहुत लोगों को फोन किये ....इस बीच जब नरेन्द्र जी को फुर्सत मिलता ..वो लोगों से बात करते ...एक दिन हम पूछे ...आपके बैच के उज्जवल जी ?? जबाब आया - दुबई ..हम बोले .."लह" ...हा हा हा ...
उनके बैच का ही और मेरा काफी करीबी दोस्त - प्रकाश जो टॉपर भी था और अब बिजिनेस मैन - अफ्रीका में दो स्टील प्लांट खरीदा है - बोला मुझे भी अफ्रीका दौरा पर् निकलना है ..फिर मेरे मुह से निकला ...."लह" ....हा हा हा ...

पर् नरेन्द्र जी अति आशावादी ...हम उम्र ही हैं ..एक दिन हमदोनो ..भर पेट यहीं इंदिरापुरम में "चिकेन चंगेज़ी" खाए ...थोडा टेंशन कम हुआ ! 

हम भी अपने ढेर सारे बैचमेट को जानते थे - खबर कर दिया गया - नरेन्द्र जी को हम साफ़ साफ़ बोल दिए - बैचमेट को "निहोरा" नहीं करने जायेंगे - सीनियर - जूनियर के 'गोर' भी पड़ लेंगे ....कौन हम अपना बेटा का "तिलक" कर रहे हैं ...

इस बीच - वरिष्ठ अधिकारी गण को फोन करने का जिम्मा मिला - सुजय जी को ! वो एक राऊंड  सबको खबर कर दिए - जितना वो जानते थे - मीडिया का  जिम्मा मिला- "आनंद वर्धन" जी को  ! नीरज आनंद बाबु - कूदने लगे - म्यूजिक रहना चाहिए ...हम लोग बोले - पाटलिपुत्रा स्टाईल में - कर भयवा ..जे करेला हउ ...वो खुद बोले  किसी भी कीमत पर् - "शीला - मुन्नी" नहीं रहेगी :) 

नरेन्द्र जी से लगभग रोज बात होते रही - भोजन 'नान वेज' और "लिकर"  इत्यादी बिलकुल ही नहीं क्योंकि डर था - सीनियर लोग 'लिकर' के बाद 'एन डी ए से लेकर रविन्द्र बालिका' घूमने लगते ...हा हा हा हा ....

फिर ...हुआ की 'एनर - बैनर' इत्यादी ..जिम्मा हम उठा लिये ...फिर हम लोग सोलह तारिख को एक बार फिर बैठे - सभी लोग मेरे ही डेरा में आ गए -नरेन्द्र जी और  नीरज आनंद जी और हम शुरू हो गए फिर से सभी को एक एक कर के फोन करना ...थोड़ी देर में सुजय और आनंद वर्धन भी आ गए ....थोड़ी देर के लिये ऐसा लगा की ..जैसे कॉल सेंटर में बैठे हैं ....उसी दिन निर्णय हो गया की ...प्रती व्यक्ती पांच सौ और एन सी आर् से बाहर वालों से कुछ नहीं ...

धकाधक बाहर से कन्फर्मेशन आने लगा ..विजय रँजन भैया ( 85 ) मुंबई से ....दिवाकर तेजस्वी भैया और उनके बैच के राकेश दुबे और आनंद द्विवेदी पटना से ...टाटा से प्रकाश ..रांची से दीपक ...पटना से विश्व प्रसिध्ध कार्टूनिस्ट - पवन और दीपक जयसवाल भैया तो एक दम से रोज खुद नगाडा पीट रहे थे :) 

अगला पार्ट का इंतज़ार कीजिए ;) ..............

रंजन ऋतुराज - इंदिरापुरम !

8 comments:

Pankaj said...

sahi vritant likhe hain... majaa aa gaya... itne jabardast show ke peechhe ki daastan, usme lagi kadi mehnat aur athak prayas... wakai daad deni hogi aaplogon ki...doosra part jaldi likhiye... intazaar nahi hota...

Neeraj Bhushan said...

दालान एक अच्छा अनुभव है.

anand said...

रंजनजी,बड़ा बढ़िया संस्मरण तैयार कर रहे हैं आप। पार्ट 1 से आगाज बहुत बढ़िया है। जल्द ही पार्ट-2 भी लिख डालिए। बातें ताजी रहती हैं तो लिखने में परेशानी नहीं होती। जिस तरह से सारी बातों को आप बेहतर ढंग से समाहित कर रहे हैं, उसके लिए बधाई
-आनन्दवर्धन, सहारा समय, नोयडा

apconindia said...

जैसा उम्मीद था वैसा ही आप लिख रहे हैं...पार्ट २ मे गर्दा उरेगा पूरा यक्कीन हैं.

Vishal said...

Pankaj bahut hi pyara likhe ho.
aage se jab bhi is tarah ka ayojan karna mujhe bata dena . Sabhi log aage aayenge

SANJAY said...

I want to write comment on your blog, but, how to write it in Devnagari

Life n said...

Padh k maja aaya par devnagri me kaise likhe. Chala padh ke santosh kar lem

Brajesh said...

majaa aa gaya padh ke.