Thursday, December 30, 2010

ये साल भी जा रहा है ....

अब से कुछ घंटो में यह साल भी चला जायेगा ! विदाई ! इससे ज्यादा कष्ट किसी और शब्द में नहीं है ! मालूम नहीं लोग कैसे नए साल का स्वागत करते हैं ! 

नया नया टी वी आया था ! टी वी के सामने बैठ - रजाई के अंदर से टुकुर - टुकुर टी वी देख रात तक जागना ! फिर थोडा शर्माते हुए - घर के लोगों को 'हैप्पी न्यु ईयर' बोलना और सो जाना ताकि सुबह उठ कर - "मुर्गा" खरीदने जाना है ! बस यही था - नया साल ! मोबाईल नहीं होता था ! बहुत हुआ तो घर वाले सरकारी फोन से किसी खास दोस्त को ! कभी कभी वो भी नहीं ! 

बहुत दोस्त लोग पटना के 'बौटनिकल गार्डन' में - तो कोई गंगा किनारे - दियारा में ! तो ढेर एडभांश भाई लोग 'फिएट कार' से राजगीर ! हम कभी नहीं - कही नहीं ! 

बंगलौर में नौकरी किया तो एम जी रोड पर् ! तब देखा की 'रात में नए साल ' में प्रवेश करते समय - कैसे चिल्लाया जाता है ! हम कभी नहीं चिल्लाये - कोई साथ में था भी नहीं - जिसके साथ चिल्लाया जाए ;) 

बाबा - बाबु जी को कभी 'शराब' के साथ नहीं देखा ! चाचा के जेनेरेशन में लोग 'ड्रिंक' करने लगे ! मेरे संगी साथी - "हार्ड - सोफ्ट " ! और नया जेनेरेशन .......कॉलेज में था तो ऐसा आईटम लोग का कमी नहीं था ...घर से ड्राफ्ट आया नहीं की ...शुरू हो गया ' 31 दिसंबर' का पार्टी का प्लान ! घसीट के सब ले जाता था ! नहीं जाने पर् - ऐसा लगता जैसे हम इस दुनिया के प्राणी नहीं हैं ! अपना पैसा से 'खिला पिया ' दिया फिर एक सप्ताह बाद - हिसाब ! जो "पीता" नहीं - उससका हिसाब अलग से ! अजीब हाल था :(

थोक में ग्रीटिंग्स कार्ड खरीदाता - साथ में स्केच भी ! खूब मन लगा के - दोस्त - सगे सम्बन्धी का एड्रेस लिखता - लिफाफा में ! फिर हर दिन डाकिया का इंतज़ार - सभी कार्ड्स को इकठ्ठा कर बेड के नीचे तोसक के निचे रखना ! फुर्सत में - उनको बार बार देखना ! 'किसी खास का कार्ड हो तो बिन कहे शब्दों को बार बार पढ़ने की कोशिश करना' :))

जब से नॉएडा - इंदिरापुरम आया हूँ - हर बड़ा दिन कि छुट्टी में परिवार 'पटना' चला जाता है :( कुछ अकेले ही यह दिन बितता है :( सबसे पहले पत्नी का ही फोन आता है ! पूछती है - क्या खाए ? मालूम नहीं इनको मेरे खाने का ही ज्यादा चिंता रहता है ! :) फिर उनसे पूछता हूँ - 'माँ - बाबु जी - बच्चे सो गए , क्या ? ' कहती है - हाँ ! सुबह में - माँ और बाबु जी का फोन ! माँ आज भी मुझे 'आप' कह कर ही बुलाती हैं :) बाबु जी - भोजपुरी में 'तू' हम भी उनको भोजपुरी में उनको 'तू' ही बोलते हैं और हिन्दी में 'आप' :) बहस हिन्दी में होती है - "आप" के साथ !

अब साल कैसा बिता - यही सोच रहा था ! जहाँ काम करता हूँ - वहाँ 'अरियर' के साथ 6th पेय कमीशन लागू हुआ ! प्रोमोशन भी मिला ! सहायक प्राध्यापक से 'सह- प्राध्यापक' हो गया हूँ - इस शर्त के साथ की - अगले कुछ सालों में 'पीएचडी' कर लूँगा - वर्ना नौकरी खतरे में है .... :( और मेरे पास 'पीएचडी' का कोई प्लान अभी नज़र नहीं आ रहा है :( सन 2005 में मुझे डबल प्रोमोशन मिला था - मेरे महाविद्यापीठ के पचास साल में पहला उदहारण ! सब , किसी अदृश्य शक्ती का कमाल है  - हम जो आज से बीस साल पहले जैसे थे - आज भी वैसे ही हैं :(

पुत्र का जनेऊ किया ! हम छपरा जिला के हैं - यहाँ एक रिवाज है - घर में किसी लडके - लडकी की शादी के साथ ही घर के छोटे बच्चे का जनेऊ होता है ! बाबु जी के शादी में चाचा का जनेऊ हुआ था ! चाचा की शादी में मेरा और चचेरी बहन की शादी थी तो मेरे पुत्र का ! बहुत खुश और रोमांचित था !  सम्बन्धी को छोड़ किसी और को   इनवाईट नहीं किया था - फेसबुक से सिर्फ दो जाने - कृष्ण सर और प्रभाकर जी ! पुत्र जब स्कूल गया तो उसे 'जनेऊ' के बारे में बोलने में थोड़ी शर्म आई तो अपने मुंडन का दूसरा बहाना बना दिया ! यह एक अलग जेनेरेशन है - मुझे खुशी है ! ( संभवतः आप लोग मेरी बात समझ रहे होंगे )

यह साल 'फेसबुक' के भी नाम गया ! कई नयी दोस्ती हुई और सम्बन्ध बने ! धर्म और जाति के बंधन से बिलकुल अलग ! कुछ लोग अजीबोगरीब ढंग से मुझसे पेश आये - भगवान उनको सुबुध्धि दे ! कई पुराने संबंधों में सुधार आया ! स्कूल और कॉलेज के कई बिछड़े दोस्त मिले ! सीनियर भी ! फेसबुक पर् जो बिहार ग्रुप हैं - वहाँ से मुझे 'फेसबुक यूथ आइकन ऑफ बिहार' मिला - अच्छा लगा ! :)) और क्या कहूँ ? :)) अतुल काफी जोशीला है - मुझे लगता है - आज के बिहार में जैसे 'जयप्रकाश आंदोलन' के लोग राजनीति में हैं - वैसे ही 'अगले दस य बीस साल में इस फेसबुक / याहूग्रुप से निकले लोग - बिहार कि सता पर् काबीज होंगे ! संभवतः तब भी यह ग्रुप मेरे साथ होगा ;) 

एक नयी गाड़ी खरीदने का प्लान था - जो नहीं हो सका ! शायद होली तक ! हम लोग बैंक में पैसा रखने वाले प्राणी नहीं हैं ! दो - तीन लाख में ही "अउल - बउल" होने लगते हैं :(  पति - पत्नी दोनों खर्चीले हैं :)  पन्द्रह साल इंतज़ार किया और एक 'बोस' का स्पीकर खरीदा ! संगीत अच्छा लगता है ! हिम्मत नहीं हो रही थी - पत्नी ने बोला ले लीजिए - कल का कल को देखा जायेगा ! 

इस साल बाबु जी बहुत बीमार रहे ! हमेशा यही चिंता लगी रहती है ! कई बार बोला - मारिये गोली - बिहार सरकार की नौकरी को - मालूम नहीं क्या सोचते हैं ? :( 

अब अगला साल क्या करना है ? 

आज तक प्लानिंग नहीं तो अब क्या करूँ ?? :( 

जे होगा से देखा जायेगा !!! 

आज से हर पोस्ट के साथ एक गीत होगा - लीजिए आज का मेरा पसंदीदा गीत सुनिए :))




रंजन ऋतुराज - इंदिरापुरम !

9 comments:

Ashish said...

Kaafi original aur apne type ka laga.
:-)

Sarvesh said...

Happy New Year to you and all your readers. I am sure you enjoyed and achieved a new milestone in the passing year. I wish you achieve and reach to higher and higher miletesons. All your dreams and wishlist come true. Thanks a lot for such a wonderful song.

Atul said...

बड़ा बढ़िया लगा आपका ये पोस्ट .. हमारा नाम भी आपने लिखा है और जोशीला भी कहा है तो सोचा की पहला comment लिख ही डालूँ .. आप original hain, different hain, opinionated bhi hai aur aapka kaafi badhiya network bhi hai .. itihas aur samaj ki jankari bhi achchi hai .. aapko सफलता जरुर मिलेगी .... meri बात पे येही कहूँगा की आप ज्यादा expectation मत बढाइये .. कितनी बार जोश में बड़ा काम भी किया और कितनी बार घर वालों और दोस्तों को aur खुद को भी निराश भी किया हूँ .. हाँ सपना देखना छोरूंगा नहीं .. बस आप जैसे लोगों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिलता रहे .. नव वर्ष की सुबह कामनाओं के साथ आपका "अतुल" ..

Ranjeet Kumar said...

बहुत ही अपना सा लगा. दिल्ली में रहते हुए नए साल का स्वागत बार ही artificial सा लगता है. एक लाइन तो होठों पे मुस्कान छोड़ गए धीमे se jaise koi अगरबत्ती जलती है - "'किसी खास का कार्ड हो तो बिन कहे शब्दों को बार बार पढ़ने की कोशिश करना' :))"

और हाँ ये पत्नियों की प्रजाति अलग होती है जो हमेशा पतियों के खाने के पीछे पारी होती हैं. सरे पतियों के साथ ऐसा ही होता है.

TV said...

आप के पद्दोनती पर हार्दिक बधाई.

Vinay Ranjan said...

Congrats for your promotion. Wish you a very happy new year, Bahoot badiya post,

om prakash said...

laga jaise srilal shukla ki rag darbari padh raha hoon. 25 saal pahle ka sabkuch aankh ke samne chla aata hai.

pankaj sharma said...

Behud pranvan laga....

Fighter Jet said...

bahut badhiyan laga padh ke....theth bhasa ka proyag bina banawatipan ke...sahaj hi dil me utar jata hai...waise naye sal aur padoonati ke liye badhai.