Wednesday, June 2, 2010

मेरा गाँव - मेरा देस ( लगन 'टाईट' बा ) - भाग - पांच

एक जमाना था - लड़का ने 'मैट्रिक' का फॉर्म नहीं भरा की 'बरतुहार' ( अगुआ - शादी विवाह वाले , लडकी वाले ) आना शुरू कर देते थे ! गाँव या टोला में एकता है तो जल्द 'शादी' ठीक हो जाती वर्ना ..लड़का बी ए फेल भी कर जाता और शादी नहीं हो पाती थी ! इन दिनों 'बियाह-कटवा' भी सक्रिय भूमिका में आ जाते हैं ! जब तक वो 'बरतुहार' को आपके दरवाजा से भगा नहीं देते ..उनको चैन नहीं आता है ! तरह तरह के 'बियाह कटवा' .... जैसे एन बारात लगने के समय हल्ला कर दिया या चुपके से 'लडकी वाले' को बोल दिया की ..'लड़का तो ......' अब हुआ हंगामा ...' हंगामा खड़ा कर के वो गायब :) या फिर जब दरवाजे पर 'लडकी वाले ' आये हुए हैं तो ..कुछ ऐसा बोल देना की ..'लडकी वाले ' के मन में कुछ शंका आ जाए ! ऐसे 'बियाह कटवा ' गाँव - मोहल्ला - टोला के बाज़ार पर बैठे मिल जाते हैं - जैसे कोई 'बर्तुहार' गाँव - मोहल्ला में घुसा नहीं की उसके पीछे पीछे चल देना ! होशियार 'लडका वाला ' लगन के पहले इस 'बियाह कटवा' को 'सेट' कर के रखता है ताकि वो कुछ कम नुक्सान कर पाए !



खैर , बियाह तय हो गया - अब बात आयी - लेन - देन की , यहाँ भी कुछ कुशल कारीगर होते हैं - आपकी 'कीमत' से बहुत कम में आपका 'माल' बिकवा देंगे :( और खैनी ठोकते आपका ही नमक खा कर - मुस्कुराते चल देंगे ! ऐसे लोगों के दबाब से बचने के लिए - लड़का वाला बंद कमरा में 'कीमत' तय करने लगा वरना वो एक जमाना था तब जब समाज के बड़े बुजुर्ग के बीच में सब कुछ तय होता था ! अच्छे लोग - तिलक - दहेज का पूरा का पूरा लडकी को 'सोना' के रूप में 'मडवा' ( मंडप) पर चढा देते थे - अब 'बैंक' में रख सूद खाते हैं !



अब लडका वाला तिलक - दहेज और अपनी हैशियत के मुताबिक 'ढोल बाजा' आर्तन - बर्तन , कपड़ा - लत्ता ' खरीदने की तैयारी शुरू कर देता है ...अब फिर से कुछ 'आईटम' लोग आपके पीछे लग जायेंगे ! आपका 'बजट' पांच हज़ार का ही तो वो उसको पन्द्रह हज़ार का करवा देंगे - अब 'बेटा' का बियाह है - लोक - लज्जा की बात है - आप बस थूक घोंटते नज़र आयेंगे ! पब्लिक समझेगा की 'फलना बाबु ' तो तिलक लेकर धनिक हो गए - जबकि सच्चाई यह है की - आपकी जमा पूंजी भी 'इज्ज़त ' के चक्कर में लग जाती है !

अब बारात कैसे जायेगा - आप मन ही मन 'बस' का सोच रहे होंगे - आपके शुभ चिन्तक आपको इज्ज़त का हवाला देकर १०-२० कार ठीक करवा देंगे - कार जीप भी ठीक करने वो ही जायेंगे - "सट्टा बैना" भी वही लिखेंगे - जब आप कुछ कम भाडा की बात करेंगे - तो आपके शुभचिंतक बोलेंगे की - अरे ..लईका के बियाह है ...कोई नहीं .फिर से एक बार थूक घोंट लीजिए ! :)

बारात में 'नाच - पार्टी' कैसा जायेगा ? इसका टेंशन एक खास किस्म के लोगों को रहता है - उनको सब डीटेल पता रहता है की ..कहाँ का कौन सा 'नाच' कैसा है ? वैसे लोगों को खबर जाता है - वो बहुत आराम से दोपहर का खाना खाते हुए ..लूंगी में धीरे धीरे टहलते ...खैनी ठोकते ..आयेंगे ! अब वो डिमांड करेंगे ..अलग से गाड़ी घोडा का ..भाई ..नाच ठीक करने जाना है :) कोई मजाक थोड़े ही है :)

फलदान में - तिलक में - कैसा 'कुक' आएगा ? यह एक अलग किस्म का टेंशन है - कोई सलाह देगा - दोनों कुक अलग अलग होना चाहिए - कोई कहेगा - मुजफ्फरपुर से आएगा - 'फलना बाबू ' के बेटा के बियाह में 'बनारस से ही नाच और कुक' दोनों आया था - अब वो जैसे ही 'फलाना बाबु ' का नाम लिया नहीं की आप भरपूर टेंशन में नज़र आ जायेंगे - बेटा का बियाह और इज्ज़त - जो न करवाए !

अब चलिए ..गहना पर ! घर की महिलायें 'जीने' नहीं देंगी ! अक्सर यहाँ एकता देखा जाता है - आप मन ही मन ५० भर सोना चढाने को सोच रहे होंगे - तब तक कोई बोलेगी - मेरे बियाह में '२०० भर' सोना चढा था - अब देखिये - यहीं पर आपका बजट चार गुना हो गया ! कोई कहेगी - मुजफ्फरपुर का 'सोनार' सब ठग है - अमकी 'पटना ' से खरीदायेगा - अब हुआ टेंशन - पूरा 'बटालियन' पटना जायेगा ! १०० भर सोना के साथ साथ ५-१० नकली अशर्फी - गिन्नी खरीद लेगी सब ! एक सुबह से शाम तक ..सोनार इनको '३ बोतल ' कोका कोला पीला के ..२-४ लाख का सोना बेच देता है और दूकान के सामने 'बलेरो' जीप में बैठा मरद का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है !

बनारसी साड़ी का भी एक अलग टेंशन है - मालूम नहीं वो 'लडकी' फिर कब इतना भरी साड़ी दुबारा कब पहनेगी :( कोई कहेगा १०१ साड़ी जायेगा ...फिर बजट हिलेगा डूलेगा ! फिर टेंशन होगा - अटैची - सूटकेस का ! सब खर्च हो गया - पर ये सूटकेस आर्मी कैंटीन से ही आएगा :)

कैसा लगा ? बताएँगे :)

रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !

17 comments:

PD said...

गजब मालिक, गजब.. लूट लिए आप तो.. ई कह के कि "सब खर्च हो गया - पर ये सूटकेस आर्मी कैंटीन से ही आएगा"..

अभिये हम अपने दू ठो यार दोस्त को उसके भाई-बहन कि शादी में अपने भैया को बोल के दानापुर कैंटीन से सूटकेस दिवाए हैं.. :D

आचार्य जी said...

आईये जाने .... प्रतिभाएं ही ईश्वर हैं !

आचार्य जी

Sarvesh said...

बहुत खूब ! गाँव के नवयुवक अपना काम छोड़ कर भर दुपहरिया लडके वाले के दालान में मंडली लगाये रहते हैं | सुबह दातुन करने के बाद चाय की व्यवस्था भी वहीँ होती है | भाग ६ का इंतज़ार रहेगा |

k said...

gr8 ...... sir ......

Arbind Jha said...

bahut khoob sir ji...... per ab len den ki baat na toe band kamre mae hota hai aur na akele mae... ab phir se sab kae saamnae mae hone laga hai.... pehlaye bade bujurg ise baat ka dhiyaan bhi rakhtae the ki FALLA BAABU hai toe thora kam karna he padega... per ab ye koe FALLA BABU nahi rahe sab ek jisa hai.... jo sabsae jada boli lagayega wahi ladka ko le jaayega

Bibhaw kumar said...

haha.. aapka koi javab nahi

...कोई नहीं .फिर से एक बार थूक घोंट लीजिए ! :)

Ram N Kumar said...

Yeh kahi aapki kahani to nahi hai...Heheheheh

डॉ .अनुराग said...

झकास !!!!

Sanjay Sharma said...

रोचक अन्दांज
सब बुकनी उड़ा देता है पैसा का .
बियाह कटवा के कारण अपनी
शादी का लड्डू फोड़ने में काफी
वक्त लगा .

Kumar Arayan said...

एक दम जबरदस्त होओं भाई जी , एक दमे से बिआह एक्सपर्ट हो गे ल हे: इ लगन मैं इ छोट भी के भी ख्याल रखी ह .

Dr. Manish Kumar "akbar" said...

EXCELLENT. First few sentences I was thinking is it necessary to write all this. But as I kep reading, I felt, no to glorify, to make it obvious, we need such writings. Its realy great. Keep going.

anjani said...

ye kahani ghar ghar ki hai i mean more or less every bihari ki hai

kashinath said...

7

kashinath said...

bil sahi kaha aapne, kahate hua acha to nahi lagta hai paar , bihar me ek hi festival manaya jata hai woi shaadi , uske sabhi pahalu bhi aap logo ne likhe sahi baat hai

kashinath said...

me bhi itna nahi janta tha is subject paar , http://www.noinvestmentearn.50webs.org

raj said...

The article is worked as a mind opener about the society of the Bihar.

Shekhar said...

Bahute badhiya likhe hai. Ekdum se fanishwar nath renu yaad aa gaye.
Plz keep it up. I will wait for more details on ceremonies....
ek dum apni theth bhasa me...jaise Gamkauya Bhaat..