Saturday, September 1, 2007

संसद और सांसद

मैं करीब साढे चार - पांच बजे शाम को घर वापस लौटता हूँ ! आते ही चाय - नास्ता वैगरह के साथ साथ अपने "T V "पर लगभग सभी खबरिया चैनल को एक नज़र देखता हूँ ! "मानसून सत्र " चल रह है संसद मे सो "लोकसभा T V " पर आ कर रूक जाता हूँ ! देश के सबसे ताकतवर स्तम्भ को "लाइव" देख अछ्छा लगता है ! लोकसभा मे जो भी व्यक्ति बैठा हुआ है - वोह देश का सबसे ताकतवर है ! यह बात १९७७ और १९८० के आस पास मेरे दिमाग मे बैठ गयी और अभी तक है ! और यही सच्चाई है !
शाम के वक़्त बहुत कम सांसद बैठे होते हैं ! सुना सुना सा संसद अछ्छा नही लगता है ! फिर भी कुछ लोग बैठे होते हैं और कुछ कुछ बोलते हैं ! उन्ही बैठे लोगों मे एक हमारे क्षेत्र के प्रतिनिधी यानी पटना के सांसद "श्री राम कृपाल यादव" जीं भी होते हैं ! मैं उनको हर रोज कुछ ना कुछ बोलते देखता हूँ - सच पूछिये तो मेरे मन मे उनके प्रति बहुत आदर बढ़ गया है ! मैंने उनको अपने ही रेल मंत्री को धावा बोलते देखा है ! "बिहार" का कोई भी मुद्दा हो और वोह मुद्दा राम कृपाल जीं से छुट जाये - यह हो नही सकता ! कई बार तो वोह देश के दुसरे प्रांत से सम्बंधित वाद विवाद मे हिस्सा लेते हैं ! कल परसों उनको ग़ैर बिहार मसलों पर बोलते देखा ! वैसे कभी कभी सभापति बने हुये मधुबनी के सांसद स्री देवेन्द्र यादव जीं - राम कृपाल यादव को ज्यादा समय नही देते हैं ! देवेन्द्र प्रसाद भी एक अच्छे सांसद हैं ! कल श्री नवीन जिंदल के "प्रायवेट बिल " पर इन सबों को खुल के बोलते देखा ! यहाँ भी , राम कृपाल यादव जीं छाये रहे !
अगर मैं प्रधानमंत्री होता तो उनको किसी ना किसी मंत्रालय का मंत्री बना देता ! लल्लू जीं के साथ है - यह वरदान है या श्राप - यह बात राम कृपाल जीं से ज्यादा कोई नही जानता होगा ! राम कृपाल जीं पटना के बीचों बीच बसें हुये मुहल्ला "गोरिया-टोली " के निवासी है ! "गोरिया टोली " के यादव यह समझते हैं कि "पटना" उनका है और हम ही खांटी 'यादव' है ! यह बात लालू जीं भी अछ्छी तरह से जानते हैं ! जब जय प्रकाश नारायण यादव जीं मंत्री बन सकते हैं फिर राम कृपाल जीं क्यों नही ? क्या "खांटी " और "खानदानी " यादव होना अभिशाप है ?

रंजन ऋतुराज सिंह , नौएडा

1 comment:

Sanjay Sharma said...

Kathani aur Karani me samanta jahan
bhi Dikhayee de Turant Taali,agar
Asamanta dikhe turant Gaali de deni
Chaahiye.
Lekin Neta,Wakil aur Prof.ye log na bolega to aur kaun bolega.khaali bolane par,khaali likhane par taali nahi chutaki leni chahiye.ye meri nizi rai hai.