Wednesday, October 6, 2010

बिहार चुनाव - भाग एक

कल देर रात तक 'चन्दन' पास बैठा हुआ था ! बोला - भैया , अब आपको राजनीति ज्वाइन कर लेना चाहिए ...फिर हंसने लगा ..आप इतना "तीखा"  बोलते हैं - कौन आपके साथ रहेगा ? :(  फिर उसको बोला ..मेरा 'ब्लॉग' पढ़ो :) मै "बिहार राजनीति" का बाल कलाकार 'सचिन' हूँ :) बहुत देर तक बातें हुई !

इस बार अजीब हुआ - कई लोग फोन किये - रंजन जी , यही मौका है - कूद जाईये ! एक देर रात - राजीव कुंवर अड् गए - अभी बाओ डाटा भेजिए - अभी का अभी ! खैर , ना तो इतना पैसा है और ना ही 'कुब्बत' ! बेरोजगार होता - पटना में होता तो कोई और बात होती ! कई करीब के दोस्तों ने समझाया - अभी खेलो - कूदो , फिर आराम से "हनुमान कूद" करना :)

बिहार में एक कहावत है - किसी से दुश्मनी है तो उसको एक 'सेकण्ड हैंड गाड़ी' खरीदवा दो - दुश्मनी गहरी है तो 'चुनाव' लडवा दो :) एक जमाना था - जब चुनाव में खेत बिकते थे - अब 'चुनाव' में हारने के बाद भी लोग नॉएडा में प्लाट खरीदते हैं :) कॉंग्रेस के एक बहुत ही बड़े नेता से बात हो रही थी - बोले - क्या हीरो - कब आ रहे हो मैदान में ? मै एक शर्मीला लडका की तरह नजरें झुका मुस्कुराने लगा - वो बोले - अरे , इंदिरापुरम में फ़्लैट लिए हो न ..क़र्ज़ से लिए होगे ...एक चुनाव में सब क़र्ज़ खत्म हो जायेगा :)

देखिये , बाहुबली से डर नहीं लगता है ! बिलकुल नहीं ! डर लगता है - नेता सब से ! कहाँ 'सेट' कर दे और आप 'बैकुंठधाम' :( बात करीब तेईस साल पुरानी है - बिहार के प्रथम बाहुबली 'काली पांडे' जी हमारे सांसद हुआ करते थे ! मै मैट्रीक के परीक्षा के बाद अपने गृह जिला के दौरा पर् था और तत्कालीन मुख्यमंत्री 'श्री विदेश्वरी दुबे' जी भी आने वाले थे सो हम सभी उनकी आगवानी के लिए लोकल हवाई अड्डा पर् खड़े थे ! मेरी थोड़ी नोक झोंक 'काली पांडे' जी से हो गयी - जो बिलकुल मेरे बगल में थे ! मेरे दादा जी बीच बचाव करते - पर् मै पुरे आवेश में था जिसका भरपूर इज्जत "काली पांडे" ने किया - पर् इस छोटी सी घटना ने कईओं को आशा जगा दिया की - एक दिन मै भी .....

राजनीति ठीक है ..लेकिन 'हिंसा' देखकर डर लगता है ! बहुतों को मौत के घाट तक पहुंचते देखा हूँ ! कई करीबी ! यहाँ घात होता है ! मर्दों की तरह सामने से लड़ाई नहीं होती है ! जो कल तक आपकी उंगली पकड़ 'राजनीति का पाठ' पढ़ रहा था वो आज अपने निजी स्वार्थ के लिए आपकी हत्या करवाने में थोडा भी नहीं जिझकेगा - ये बहुत ही गलत है ! नगीना राय की हत्या देखी है ! उस दौर में "गोपालगंज" में कई हत्याएं देखी ! लगातार ! 

लेकिन ये नशा है ! नगीना राय को मरे १९ साल हो गए - एक बार फिर उनके पुत्र 'महेश राय' कॉंग्रेस की टिकट पर् चुनाव लड़ रहे हैं ! सोचा फोन करूँगा ! कई अपने अलग अलग पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं !

मंजीत हमारे विधायक होते थे ! पिछली दफा हार गए ! हमलोगों की बहुत इज्जत करते हैं ! नितीश ने उनको फिर एक बार टिकट दिया है ! आशा है जीत जायेंगे ! उनके पिता जी हमलोगों के विधायक होते थे - हमसभी उनको 'बाबूसाहब' कहते थे - छोटे सरकार ( सत्येन्द्र बाबु) के दाहिना हाथ ! राजनीतिक विरोध था पर् बड़े ही खानदानी थे ! 'बड़े आदमी' ! छोटापन नहीं था ! सत्येन्द्र बाबु के कैबिनेट में वो थे - मंत्री बनने के बाद सबसे पहले हमारे दरवाजे पर् आये थे - हमने भी उनके 'बडपन्नता' को इज्जत दी थी !

पारिवारिक मित्र और पटना में हमारे परिवार के अभिभावक 'कृष्णकांत बाबु' के परिवार से उनके बड़े लडके - चुन्नू बाबु गोरियाकोठी से भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं ! फरवरी २००५ में जीते भी थे ! इस बार उनको जरूर जितना चाहिए ! इस परिवार ने 'गोरियाकोठी' को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई है ! बिहार का कोई भी ऐसा जिला नहीं है जहाँ आपको इस गाँव की कोई लडकी डॉक्टर नहीं मिलेगी !

और क्या लिखूं ? सभी अपने जीते ! शुभकामना रहेगी !

पर् मुझसे 'नितीश कुमार' नहीं "घोंटाता" है :( 






रंजन ऋतुराज सिंह - इंदिरापुरम !

3 comments:

nanhe said...

u r right. this is even i fear in bihar. probably many good candidates do not come out because of this fear

sonu said...

sahi kehte hai bhaiya.......

sonu said...

thik bole bhaiya jee