Wednesday, August 8, 2007

प्रमोद भाई जीं का ब्लोग

शायद वोह मुम्बई मे बसें हुये हैं ! शायद वोह भी एक पत्रकार है ! शायद वोह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं ! कुछ भी हो लेकिन लिखते एकदम मस्त हैं !
वोह लिखते हैं :-
" जन्‍मस्‍थान के प्रति प्रेम के स्‍तर पर भी आदमी और कुत्‍ते के बीच कोई मुक़ाबला नहीं। कुत्‍ते का अपनी ज़मीन से जो ममत्‍वपूर्ण लगाव है, आदमी क्‍या उसके घुटने तक भी पहुंचने की सोच सकता है? नहीं सोच सकता. बिलासपुर या पटना के किसी कुत्‍ते के बारे में आपने कभी सुना है कि वह अपनी धरती छोड़कर पैरिस या न्‍यूऑर्क जा बसा? नहीं सुना होगा. क्‍योंकि कुत्‍ते जिस ज़मीन की नमक खाते हैं, उसी का कर्ज़ अदा करते-करते इस नाशवान जीवन का होम कर देते हैं. जबकि आदमी इस नाशवान जीवन का होम करने उसे कितने सैकड़ा व हज़ार किलोमीटर दूर, कहां-कहां नहीं ले जाता? मुहावरे में भी आदमी को ही नमक हराम बताया गया है. कुत्‍ते को नमक हराम बताने की घटना प्रकाश में आई है? नहीं, अभी तक अंधेरे में है.
ranJan rituraJ sinh , NOIDA

5 comments:

Jitendra Chaudhary said...

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Dhanakar said...

aadmi ka kate aadmi nahee bachta kutta ka kate teen aadmi bache hain abhee tak rabies se.

परमजीत बाली said...

बहुत सही है,एकदम खरी बात-

किसी कुत्‍ते के बारे में आपने कभी सुना है कि वह अपनी धरती छोड़कर पैरिस या न्‍यूऑर्क जा बसा? नहीं सुना होगा.

Pramod Singh said...

मस्‍त रहो, बच्‍चा.. मगर तनकी संभल के.. जादा लड़ि‍याना कवनो समझदारी का काम नहीं है.

MUKHIYA JEE said...

Pramod bhai jee , aapaka AASHIRWAAD mila , yahi mere liye bahut hai !

aapaka

ranJan