Thursday, August 23, 2007

गुनाहों का देवता !

आज "संजू बाबा" रिहा हो गए ! एक प्रसंशक होने के नाते मुझे अच्छा लगा ! यूं कहिये बहुत अच्छा लगा ! लेकिन सजा बहुत है ! वोह खुद करीब १४ साल पहले १६ महीने के लिए सजा काट चुके हैं ! बिहार के बेगुसराय और पूर्वांचल के गाजीपुर मे आपको कई ऐसे लोग मिल जायेंगे जिनके पास बिना लाईसेन्स का ही हथियार होता है ! यह पकडे नही जाते ! पकडे भी गए तो थानेदार साहब कुछ ले देकर मामला राफ़ साफ कर देते हैं !
लेकिन यहाँ मामला कुछ अजीब है ! किसी ने कहा कि अपराधी तो संसद मे भी है ! कोई कुछ क्यों नही कर लेता है ! खैर , मेरी क्या awakaat कुछ बोलने कि !
लेकिन एक सवाल आप सभी लोगों से - "सजा का क्या मतलब है ? " सजा क्यों दीं जाती है ? क्या , समाज को संदेश दी जाती है ? या मुजरिम को सुधरने का एक मौका ? अगर समाज को संदेश देना है तब तो ठीक है ! लेकिन अगर मुजरिम को सुधारना ही "सजा" का मकसद है और अगर मुजरिम खुद से सुधर जाये और समाज उसको अपना ले फिर भी सजा जरुरी है , क्या ?
कुछ लोग कहेंगे कि Bomb बिस्फोट मे मरे हुये लोगों के परिवार के आंसू कौन पोछेगा ?
मेरे भी कुछ सवाल है :-
#। घटिया राजनीति के कारन मेरा बड़ा भाई अब तक बेरोजगार है ! ४० बरस कि उमर मे वोह हर रोज मरता है !
#। पूर्वांचल और बिहार मे बाढ़ आ गया ! केंद्र के नेता , हाथ पर हाथ धरे बैठे हुये हैं ! क्या इन नेताओं को सजा नही मिलनी चाहिऐ !
#। जब देश के सभी राज्यों के लोगों को घर मे ही नौकरी मिल रही है और हम लोग "second citizen" बनने को मजबूर हैं ! इस घुटन के लिए किसको सजा मिलनी चाहिऐ !
कई सवाल हैं - मज़बूरी वाले 'जबाब' भी हैं ! तब ही तो ज़िन्दगी चल रही है या हम जिंदगी काट रहे हैं ! जैसे , एक मुजरिम अपनी 'सजा' काटता है !
रंजन ऋतुराज सिंह , नौएडा

2 comments:

बेवज़ह् said...

मुखिया जी,
खूब कहें हैं ... हम सोचे की शिबू चाचा को भी आप इस रिहाई में जोडियेगा ... देखिये का का नही किए चाचा लेकिन... क्या मजाल की राजमाता के रहते हुए और शिबू चाचा का राजनितिक सहयोग रहते हुए उनका कोई बाल भी बका कर दें

Isht Deo Sankrityaayan said...

बहुत ख़ूब मुखिया जी. सही लिखे हैं. असली सवाल तो यही है.